"जब तुम्हारा कोई साथ न दे तो, अकेले ही पथ पर चलते रहो, सहस्त्रों वर्षों से उत्पीड़ित शोषितों के जीवन में नया प्रकाश फैलाने के लिए अल्पायु में ही ज्योतिबा भी अकेले चले थे, केवल जीवन संगीनी का ही उन्हें सहबल प्राप्त था।"
गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर

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